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Monday, December 31, 2012

HAPPY NEW YEAR

नव वर्ष मंगलमय हो .......
कुछ आंसू कुछ मुस्कान 
कुछ स्थूल कुछ सूक्ष्म 
कुछ स्पर्श कुछ गंध 
कुछ भाव कुछ अनुभाव कुछ प्यार कुछ तकरार 
अपनों का स्नेह अपार ............
ये ही तो सौगातें हैं विगत वर्ष की ...........
आगत वर्ष में मै इन सब का ही अभिनन्दन करती हूँ
साथ ही देश औ समाज को आप नयी दिशा दें 
कोई कलंक न लगने दें 
नवल विहान दे ये कामना ही तो करती हूँ
आप देश की तकदीर बदल दें ....

HAPPY NEW YEAR

GOD GIVE ME STRENGTH! In 2013----I thank all the special frds who touched my heart with their love n care & made my life more meaningful, more thoughtful.Wish you an everlasting glow of health n happiness in this year n ever.
Encourage near and dear ones to aim high in 2013.Happy New Year

Friday, December 28, 2012

बुझ गयी ज़िन्दगी

बुझ गयी ज़िन्दगी एक 
बुझती रही ऐसे ही ज़िन्दगी कितनी 
तुम न बुझने देना इनके एहसासों को 
रावण के देश में भटकती सीता की आत्माओं को ....

बेटी तुझे माँ का सलाम ! 

Bujh gayi zindagi ek 
Bujhti rahi aise hi zindagi kitni 
Tum na bujhne dena inke ehsason ko 
Ravan ke desh me bhatakti sita ki atmaon ko ..

BETI TUJHE MA KA SALAM

Monday, December 24, 2012

रुद्रानी शिवानी है....

रो रही धरा रोता ये आकाश है , मानवता का कैसा ये ह्रास है 
चुप रह कर हमने सज़ा बहुत ही पाई ,अब न रहेगी चुप ये भारत की नारी 
सूरज पर भी कालिख पोता चाँद पर सच ही आज लगा कलंक है 
क्या जानवर से भी गए बीते घूमता बर्बर निशंक है 
किसी माँ के गर्भ से जन्म लिया होगा 
किसी बहन के साथ खेला भी होगा
किन्तु आग लगी तन में अपनी ही माँ बहनों को शर्मसार किया
तुम सब ने अपनी ही माँ बहनों के साथ ऐसा दुष्कर्म किया 
यह आदमी का काम नही इन खूंखार भेडियों को दूर करने हमने ठानी है 
हम फूल नही चिंगारी हैं हम रुद्रानी शिवानी है

Saturday, December 22, 2012

MAA TUJHHE SALAAM

MAA TUJHHE SALAAM
We, Rajiv=Jaya, Bhawna=Prakash, Vandana=Kaushlendra, Suparna=Manoj, Sanjeev=Shabnam, Taruna=Vikas ; Suprabha-Prasoon, Arushi-Aditi, Ankita-Anupama, Sanskriti-Abhishri, Deepankar, Satwik salute our mother/ grandmother Dr. Shefalika Verma [ Rajni]who was awarded Sahitya Akademi Award 2012 on 20.12.2012, Thursday for her Autobiography entitled Kist Kist Jiwan. Through her life journey full of ups and downs, we learnt the values of love, sacrifice, struggle, patience, toleration, relationship, togetherness, activism, leadership, importance of art, literature, culture and many more. She is rightly known as the Mahadevi of Maithili and Kavya Vinodini. She was born on 9th August, 1943 and at the age of 16, got married to Lalan Kumar Verma popularly known as Prince of Dumra, Saharsa [ son of Kadambari and Surya Narain], a student of Patna Science College and later on a successful lawyer at Saharsa District Court and Patna High Court. She has three devars- Mohan, Sunil and Anil and four nanad – Meena, Renu, Rambha and Indira. Daughter of Annapurna and Brajeshwar, She has six sisters – Deepmalika=Amar, Madhulika=Shankar, Mrinalika= Bijay, Chayanika= Hridaya, Sarika= Pankaj and Niharika= Baidyanath and three brothers- Krishna= Chanda, Sharad=Anu and Asim=Samita. She herself is blessed with two sons and four daughters. She is proficient in many languages and her English poem My Village is taught at school level in England. She has championed the cause of women, her anti-dowry stand is laudable. She is a true representative of women empowerment. She started writing in Maithili in 1961 and received Sahitya Akademi Award in 2012. She has proved herself to be the proud daughter of the land of Mithila. And we feel proud to be her children and grandchildren.
\DR. RAJIV KUMAR VERMA 

किस्त-किस्त जीवन


Manoj Kumar Jha
June 10
मित्रों, बचपन से ही मुझे पढने में मन नहीं लगता था, इसका मतलब ये नहीं कि मैं पढाई में कमजोर था, मतलब ये कि आज तक मैंने किसी किताब को आद्योपांत नहीं पढ़ा. चाहे वो पाठ्य पुस्तक हो, साहित्यिक उपन्यास हो या कोई धार्मिक पुस्तक. किन्तु मैंने मैथिली की महादेवी द्वारा रचित "किस्त-किस्त जीवन" को पूरा यानि आद्योपांत पढ़ लिया. लगातार नहीं, किस्त-किस्त में. इसके दो कारण हैं- (१) यह पुस्तक स्वयं महादेवी ने अपने हाथ से हमें उस समय भेंट किया था जब वो स्वल्प समय के लिए मेरे गरीबखाने में आयी थी, इसलिए इस पुस्तक से मेरा दिल ना नाता हो गया (२) इस पुस्तक से उस महादेवी के सम्पूर्ण जीवन वृत्तांत को जानने का मौका मिला जिसे मैंने बिना देखे-जाने अपना आदर्श मान लिया था. आज इस पुस्तक को पढने के बाद मेरी नजर में उनका कद और भी बढ़ गया है, यह पुस्तक मेरे लिए रामायण, गीता, वेद-उपनिषद, बाइबिल, कुरान-शरीफ या गुरु ग्रन्थ साहिब की तरह पवित्र है. मैं इसके दो-चार पेज रोज पढता हूँ और अपने आप को बडभागी मानता हूँ. ई पुस्तक हम्मर शक्ति रहत, दुर्बलता नहि, —

साहित्य अकादेमी पुरस्कार- 2012


साहित्य अकादेमी पुरस्कार- 2012

शेफालिका वर्मा
साहित्य अकादेमी पुरस्कार- 2012 केर घोषणा भ' गेल अछि। मैथिली मे  शेफालिका वर्मा के हुनक आत्मकथा- क़िस्त क़िस्त जीवन लेल अहि बेरक साहित्य अकादेमी पुरस्कार भेटल छन्हि। मैथिली मे साहित्य अकादेमी केर युवा पुरस्कार अरुणाभ सौरभ के हुनक काव्य संकलन- एतबे टा नहि लेल देल गेल  छन्हि।
अरुणाभ मैथिली मंडन केर सतत सहयोगी रहल छथि। हुनक अहि संकलन केर दू गोट कविता किछु दिन पहिने अहि ब्लॉग पर प्रस्तुत  कयल गेल छल। हनक कविता पढ़बा लेल क्लिक करू-अरुणाभ सौरभ केर दू गोट कविता
शेफालिका आ अरुणाभ के बहुत बधाई आ अशेष शुभकामना।



Monday, December 17, 2012

मेरे घर का पता


मुझसे 
मेरे घर का पता पूछते हो ?
मोहब्बत  जहाँ लिखा हो उस  
घर में हम रहते हैं 
खुशबू  हो इंसानियत की जहाँ 
उस दिल में हम 
बसते हैं..........

Mujhse mere fgar ka pata puchhte ho 
Mohabbat jahan likha ho us 
Ghar me hm rahte hain 
Khushboo ho insaniyat ki jahan
us dil me hm baste hain...

Thursday, December 13, 2012

परिभाषा प्रेम की ( कामायिनी -उर्वशी )


परिभाषा प्रेम की 
( कामायिनी -उर्वशी )
                डॉ. शेफालिका वर्मा ///..........
 तुम पुरुरवा हो /
देह काम में डूबे से /
मै श्रधा हूँ
जगती  में आयी भूली सी /
तुमने माना
देह प्रेम कि जन्म भूमि है /
मैंने समझा
प्रेम ह्रदय  कि विस्तृत 
जलनिधि  है /
तुम
उर्वशी को भर बाहों  में
पाठ  प्रेम का पढाते /
मै मनु को ले
ह्रदय-गुहा में
दिखलाती जीवन की राहें !
/उस  अरूप के रूप का
तुम देह-गंध  पीते
/हम मानस के शतदल  में
सौरभ  की साँसे  जीते /
तुम में तृषा जीने की पीने की /
मै खेलती  खेल
मन से मन में खोने की /
पुरुरवा !
तुमने पायी उर्वशी
भोली भाली अल्हड  सी / 
बंधनहीन ,सीमाहीन आ समायी
उन्मुक्त प्रतिमा मंद समीरण पर
मदमाती सी !!/
परिभाषा  प्रेम की है विचित्र ....../
देश काल वय विस्मृत  कर
मानव जीवन
बन जाता बस एक चित्र /
अतृप्ति की प्यास लिए
दौडती  वह जलधारा
/सारे रिश्ते ,सारे बंधन
बन जाते एक कारा /
क्या होता कवि यदि चैन तुम्हारा
सुकन्या की आँखें हर लेती /
आरती की दीपशिखा  भुजबंधों में
तेरे सिमट  पाती ??
तब होती क्या परिभाषा  प्रेम की
देह प्रेम की जन्म भूमि बन
मृणाल भुजाओं में बंध पाती...??
देह भुजाओं  में निर्बंध  बंध जाती ..???

Tuesday, December 11, 2012

12-12-12.

We must celebrate this day becoz 13-13-13....will never come ..We r lucky 2 c such dates like 7-7-7, 8-8-8, 9-9-9-,10-10-10, 11-11-11- n now it is 12-12-12... tTHIS IS D END OF AN ERA...HAVE A SMILEE DAY, FLOWERY DAY 2 U ALL....

Friday, December 7, 2012

प्रश्न अनुत्तरित......


‎'तुम बेटी हो
सबों की सेवा के लिए जन्म हुआ तुम्हारा
घर के काम काज सीखो
पढो लिखो , नौकरी करो ...नौकरी करनेवाली
बेटी का ब्याह
हाथो हाथ हो जाता है ...
क़िस्त क़िस्त में दहेज़ जुटाती है
सास ससुर की छाती जुडाती है
पति के मन के अनुरूप चलना
अंत में स्वर्ग पाना ............'
......और इसीलिए
भोर से रात तक ,जन्म से मरण तक
जीती हूँ तुम्हारे लिए
गृहस्थी की गाड़ी में बैल की तरह जुती हूँ तुम्हारे लिए।।
अपना होश कहाँ
अपनी सुध भूल जाती हूँ

और तुम ..??

कभी सब्जी में नमक नही
चाय में चीनी कम
कुरते में बटन नही ..घर द्वार साफ नही
बिस्तर मैली कुचैली
झोल झाल से दीवारें भरी ..कुछ करने का शवुर नही
और न जाने क्या क्या
दिन रात सुनती हूँ ,सुनती रहती हूँ
तुम्हारी आवाजे दीवारों को ही नही
दिल के धडकनों को भी रोक देती है
सोचती रहती हूँ
सुख दुःख जन्म मरण में साथ देने के वचनों के साथ
तुमने मुझे लाया था
मन को सपनो से सजाया था
घर से बाहर तक का काम मै करती हूँ
क्या मै तुम्हारी पत्नी हूँ ?? या कि जीवन पर्यंत
बिन तनखाह खटने वाली नौकरानी हूँ ??

प्रश्न अनुत्तरित रह जाता है................

Wednesday, December 5, 2012

-अहीं बाजु.....


भगवन !
अहाँ तं मनुखक निर्माण केलों 
तखन ई अमीर गरीब के बनौलक ? 
जाति पाति, धर्म अधर्म क देवार
के ठाढ़ केलक  ? 
संबंधक इतिहासक पन्ना यांत्रिक युगक 
बरखा मे गलि गेल अछि 
भूख पिआस गरीबक मरि गेल अछि 
पलास सँ आगि निकलि रहल अछि 
                   हवा सँ बाण 
रेतकण झुलैस  रहल , वर्षा कें 
               अभिमान !
डोका कांकोर करमी पर जीवैत
देह पर फाटल चीटल वस्त्र नेने 
की ओकरा अहाँ ह्रदय नहि देने छी ?
की ओहि मे इच्छा कामना 
                 नहि अंकुरेने छी ?
आंखि मे सपना नहि जगौने छी ??
तखन किएक गरीब आर गरीब 
भेल जा रहल..
गरीबीक अभिशाप अमीरी क वरदान 
      बनल  जा रहल
की ओकर भगवन केओ आन छैथ 
छैथ तं के छैथ ---अहीं बाजु..... 
                           ( भावांजलि सँ )

Sunday, December 2, 2012

DR. RAJENDRA PRASAD


 राजेन्द्र प्रसाद--अमर रहैथ 

आय बटवृक्ष क मधुर छाहिर कत'
दनुजता क लंका में अंगदक
अटल पैर कत' ?
काल पंथ पर चलि गेलाह जे
सिनेह हुनक
सरसावैत अछि 
मोन प्रानक भ्रमित दिशा के
बाट वैय्ह  देखाबैत छैथ
चिर मंगलमय छल लक्ष्य महान
जीवन एक ,पग एक समान !
स्निग्ध अपन जीवन कय क्षार 
करैत रहलाह  आलोक प्रसार 
श्रृष्टि क इ अमिट विधान 
मिटबा  में  सय वरदान ...
सुनी हुनक  हुंकार 
नव यौवन बल  पावैत छल 
माथ पर बाँधी कफ़न  
कर्मक्षेत्र में आबि अत्याचार
मेटाबैत छल
हुनक सहस देखि देखि
तरुण सिंह लजावैत छल !
आय
मानवता क धवल आकास कत'
मानव एक  मानवता  गुण ,
बतवै वाला  धाम  कत'
अय विश्व  !
अहीं बताबु
जीरादेई    सन   गाम   कत'       ???

तुम पढ़ न सके


बिखरी हूँ  इस तरह कि  खंड खंड कविता बन  कर   रह गयी 
तुम पढ़ न सके 
कसक दिल में रह गयी 
प्यास कुछ ऐसी बढ़ी 
समन्दर को दरिया समझ पी गयी ...
सरसराते पत्तों की आवाज गूंजती कानो में कह गयी -
-'अरे ये बेसुरी सी बात !'-- हवा भी जैसे सहम  गयी ........

GOOD MORNING

Bikhari hun iss tarah ki khand khand kavita bn kr rah gayi
Tum padh na sake 
Ye kasak dil me rah gayi 
Pyas kuchh aisi badhi 
Samandar ko dariya samjh pi gayi 
Sarsarate patton ki awaj gunjti kano me kah gayi --
--'Are ye besuri si baat !' - hawa bhi jaise sahm gayi.....

Saturday, December 1, 2012

दूर रहो तुम मीत मेरे


अपने जीवन का परिचय किससे कहना 
कैसे कहना !
धरती के कण कण में अपने मन का 
रमते रहना 
मिटने में ही मैंने जाना जी जाने का 
स्वाद 
आंसू के माला का तर्पण 
औ हँसने  का अवसाद !
तुमने कहा बंधु  मेरे
लो मेरा ये वरदान 
मेरे स्नेह के निभृत निलय में पी जाओ 
सब अपमान  
तुमने केवल सहना जाना ,सहने में जीवन 
की प्यास मै 
अमृत ले आया हूँ , करुण जगती की आस '`
मैंने अपने दृग उठाए अचंचल स्थिर पलक 
पुतलियों की लहरों पर 
वेदना थी रही छलक ..
तुम तो अमृत के बेटे हो , अमृत लेकर आये हो 
मेरे अभाग्य को अपनाकर निज 
सौभाग्य बनाने आये हो पर 
मै हूँ अभिशाप की छाया जलना और जलाना जाना 
तेरे अमृत-घट को भी झुलसाना  जाना 
दूर रहो तुम मीत मेरे 
मेरे सुख दुःख मेरे गम से अभिशाप की बदली में 
डूबे 
टुकड़े टुकड़े जीवन के तम से .....

Monday, November 26, 2012

,संतोष का वटवृक्ष


जमीन का एक टुकड़ा मेरे हिस्से का मेरा अपना था 
नितांत अपना।
साऱी  इच्छाओं ,कामनाओं के बीज 
मैंने रोप दिए थे उसमे 
आंसुओं की धार  से जिसे सींचा था मैंने 
गेहूं धान उगाये थे मैंने किन्तु, 
सभी उसे कुचलते रौंदते चले गए,,,,, 

जमीन का एक टुकड़ा मेरे हिस्से का मेरा अपना था
जिसमे  अपने विश्वास के बीज  रोप थे मैंने 
उससे अन्कुराए थे आशा  के नन्हे नन्हे फूल  
डाल डाल  विहंस उठे थे 
किन्तु अविश्वास और विस्मय से भरे अस्थिर मन 
लोगों  ने चूर चूर क्र दिए मेरे विश्वास को
मेरी आश को  ,,,,,,,,,,

जमीन का एक टुकड़ा मेरे हिस्से का मेरा अपना था
रोप दिए मैंने सपने अपने 
प्रेम व् स्नेह से कुछ अद्भुद कर दिखाने  का  
मानवता का संसार बसाने का .,,,,,,
आज समस्त विश्व मेरे सपने को आँखों में भर 
सत्य शिव व् सुन्दर की ओर आगे बढ़ रहा है 
मेरी जमीन 
उर्वरा हो रही है,,,संतोष का वटवृक्ष फैलता जा रहा है।।।।।

सत्य


जब  जब मैंने सत्य को खोजना चाहा 
असत्य मेरे समने आ   मुस्कुराने लगा
मन मेरा हारने लगा 
रेत की दीवार पर 
लहरों के तट पर
चांदनी खोजती रही 
प्रत्येक चेहरे से पेड़ों की छाल की तरह 
नकाब उतारती  रही 
कितना  विरूप है ये असत्य ,  कितना कठोर 
तपते मरुथल में मै भागती रही
जिन्दगी से समझौता करती रही
संस्कार को बनाने के लिए 
व्यवस्था के प्रपंच को कुचलने के लिए 
पता नही कब कैसे इस व्यवस्था का अंग बन गयी  
मै स्वयम असत्य बन गयी .......
औरों के आंसू पोंछते
आँचल खुद का भिंगो गयी .................
 

Sunday, November 25, 2012

स्नेह की सत्यता

स्नेह की सत्यता को ह्रदय की गहराई से सोचें ,समय की इकाई से न तौलें। कब किसके साथ कौन सी स्थिति रहती है -कोई नही जानता .कभी किसी ग़लतफ़हमी में पड़ कर अपने मन को मलिन न करें, रिश्ते टूटने में क्षण भी नही लगते किन्तु जोड़ने में वक़्त का कितना पानी बह जाता है, जुटता भी है तो एक दरार लिए ..लोगों को स्नेहिल ह्रदय से पहचान रिश्ता बनाये रखें।।फिर विश्व बंधुत्व की भावना भी साकार होती जाएगी.........सुप्रभा
त।।।.
.
Sneh ki satyta ko hriday ki gahrai se sochen, samay ki ikai se na toulen. kab kiske sath kon si sthiti rahti hai- koi nhi janta ,kabhi kisi galatfahmi me parh kar apne mn ko malin na karen. rishte tutane me kshn bhi nhi lagte kintu jodne me waqt ka kitna pani bah jata hai ,jutata bhi hai to ek darar liye. logon ko snehil hriday se pahchan rishta banaye rakhen....fir vishw bandhutw ki bhawna bhi sakar hoti chali jayegi...GOOD MORNING...

धरती के देवता


डॉक्टर !
तुम धरती के देवता हो
हाथों में औजार लिए शल्य क्रिया से
ह्रदय नारी का
तार तार कर देखा तुमने ;
प्यार,ममता,मोह आदर से भरे
लहुलुहान पिंड को किनारे रख दिया तुमने
अस्थि चर्ममय देह के सारे अवयव
यंत्र मात्र है तेरे लिए
चीरा, काटा कुछ टांको से घाव
भर दिए तुमने !
किन्तु, तुम भूल जाते हो
नारी का अंतर्मन भी होता है एक
जहा त्याग ओ समर्पण के फूल खिलते है
वहां तक तुम्हारे एक्सरे की पहुँच नही
किसी भी मशीन की पहुँच नही
विज्ञान लाख तरक्की कर जाये
सभ्यता विकसित होती जाये
किन्तु, तुम नारी के मन को पहचान न पाओगे
अधूरे उपचार से प्राण नही भर पाओगे ..मन को जानने
मन की जरुरत है
उपचार शल्य क्रिया की नही..
शाश्त्र पढ़ तुम धरती के देवता बन गए
किन्तु नारी शक्ति है
शक्ति के बिना देवता कुछ भी नही
पढ़ चुके मानव वेद, इतिहास सब , नारी के मन को पढ़ न सके.
युग युग से भीत चकित नारी
स्वयं अपने को जान न सकी.....
 
 

Saturday, November 24, 2012

वीराने मे कैक्टस

कितना मुश्किल है जिए जाना भी 
जिंदगी की कैद मे साँस लेना भी 
दिल के जख्मो मे भी आंसू निकल आये 
खून के कतरों मे भी दर्द छलक आये 
कितने अरमा से छुवा था मैंने गुलाबो को 
उफ़ हथेलियों तक मे कांटे उभर आये 
चल दिए तुम भी इस जहाँ से आह 
दिल के वीराने मे कैक्टस निकल आये 
यूँ गड़ती है कलेजे मे कभी याद भी तेरी
जैसे कैक्टस मे कोई फूल खिल आये

Friday, November 23, 2012

BATA DO JARA.

ज़िन्दगी से शिकायत करूँ तो नही ,किस ख़ुशी में रहूँ कुछ कहो तो जरा 
कौन सुरभित सुमन की प्रशंसा करूँ 
कौन सा चाँद देखूं व्यथा -व्योम में 
कौन सा पथ चलूँ ,कौन मंजिल चुनु 
कौन दीपक जलाऊं तिमिर तम  में
ये सही है कि  मेरी व्यथा   कुछ नही ,   दो घडी दर्द मेरा सहो तो जरा.......

Zindagi se shikayt karun to nhi ,kis khushi me rahun kuchh karo to jara 
Koun surbhit suman ki prashansa karun , kon sa chand dekhun vytha vyom me 
kon sa path chalun , kon manzil chunu , kon dipak jalaun timir tm me 
ye sahi hai ki meri vyatha kuchh nhi , do ghadi dard mera saho to zara..........

Thursday, November 22, 2012

DISCRIMINATION AGAINST WOMEN



 

 
Right cannot be enjoyed without knowledge of their existence. Justice cannot be obtained without awarness of the remedies available to correct injustice. Human rights are increasingly vulnerable. Our society is scared by an increasing number of Humun Rights violations.
 
It is an old saying that the hands of a women are behind every man's success. Even our religious and Scared book Durga-Saptashati  has recognized that every women possesses Power, Energy & Respect like Goddess Durga  and she is a part and parcel of the Goddess.
 
The concept of Ardh-Narishwar and it's worship are indicative of the basic fact that man and woman play equal parts in creation 'या देवी सर्व भूतेशु मात्रीरुपें संस्थिता ,' या देवी सर्व भूतेशु श्रध्हा रुपें संस्थिता'' या देवी सर्व भूतेशु शक्ति रुपें संस्थिता" etc. Mantras support the said concept. The aim of the humanity should be to give a practical shape to the concept and make the same a part  of our thought  and conduct . Then alone the development of Woman Folk and entire Nation is possible.
 
In conformity with the aforesaid thought Article-7 of the 1993 United Nations Convention on the elimination of all forms of discrimination against women calls upon all Government to ensure women's full participation in the political and public life of their countries, but our experience is that women are subjected to various types of discrimination including torture and harassment because of their civil, political, social, cultural or economic activities.
 
In principle Human Rights of Women are an integral part of Univerasal Declaration of Human Rights. The full and equal participation of women in Political, Civil, Economic, Social and Cultural life at the National, Regional and International level are the basic objectives of the International Community. Eradication of all forms of discrimination on grounds of sex is one of the main objectives, but discrimination and violence experienced are reported from every nook and corner of the world. Journalists in Morocco, Lawyers in the Phillipines, Judges in Columbia, Political Reforms in Burma, Opposition Leaders in Mozambique, Environmentalists in Kenya, Feminists in Peru, Academics in China have suffered the pangs of misries because of their participation in the political and public life of their countries.
 
Recently, efforts have been made worldwide to determine the condition of women. It has been found that majority of world's poor are women and the number of women living in rural poverty has increased by 50% since 1955. The number of illiterate women rose to 597 million in 1985 from 543 million in 1970. This shows that majority of world's illiterate are women. The statistics also showed that women earned 30% to 40% lesser than for doing equal work in violation of the human right of equal pay for equal work. They work for 13 hours a week more than men and in Asia and Africa they are mostly unpaid. They hold between 10% to 20% managerial and administrative jobs only. They make up less than 5% of the World's Heads of States.
 
It is thus evident that the discrimination against women is all pervasive throughout the world, though Equality of Rights for women is the basic feature of the United States.  
 
 In our Country the situation is more alarming. The marriage which is the basic need of human society for procreation has degenerated due to the virus of dowry system. Marriage can be performed by the equal participation of men & women, but dowry system has become so rampant that only women are victimized. We all know that marriage is a social system for systematic existence of our society, but it is not known why only women should be victimized, tortured, burnt or killed. Hardly any case has been reported in which any man has suffered due to the evils of dowry. Is not it a vital and fatal discrimination?
 
Women do jobs mostly for the financial support of their family, but when any trouble arises with women, men very often harass them instead of extending help. When the joint family breaks it is only the Women, who are made responsible for it. When a person dies in rural area the responsibility for the said death is thrown on women with the allegation of practising witchcraft and they are severely tortured. 
 
There are countless instances of discrimination of severe consequences. Will the society ever bring women on equal footing with men? 
 
                                                              DR. SHEFALIKA VERMA
  


PARICHAY


अपने जीवन का परिचय किससे कहना 
कैसे कहना !
धरती के कण कण में अपने मन का 
रमते रहना 
मिटने में ही मैंने जाना जी जाने का 
स्वाद 
आंसू के माला का तर्पण 
औ हँसने  का अवसाद !
तुमने कहा बंधु  मेरे
लो मेरा ये वरदान 
मेरे स्नेह के निभृत निलय में पी जाओ 
सब अपमान  
तुमने केवल सहना जाना ,सहने में जीवन 
की प्यास मै 
अमृत ले आया हूँ , करुण जगती की आस '`
मैंने अपने दृग उठाए अचंचल स्थिर पलक 
पुतलियों की लहरों पर 
वेदना थी रही छलक ..
तुम तो अमृत के बेटे हो , अमृत लेकर आये हो 
मेरे अभाग्य को अपनाकर निज 
सौभाग्य बनाने आये हो पर 
मै हूँ अभिशाप की छाया जलना और जलाना जाना 
तेरे अमृत-घट को भी झुलसाना  जाना 
दूर रहो तुम मीत मेरे 
मेरे सुख दुःख मेरे गम से अभिशाप की बदली में 
डूबे 
टुकड़े टुकड़े जीवन के तम से ............



Thursday, November 15, 2012

T V


टी वीक छोट छोट परदा पर माता पिता 
भाई बहिनक संग 
बाल बच्चा सँ भरल घर में 
स्त्री पुरुषक
कोन रूप देखाओल जाय रहल 
एक एक टा पत्नी के दुई दुई पति 
आय घरे घर परोसल जा रहल 
ककरा चुनी ककरा राखी
अपूर्व भाव  देखाओल जा रहल समाचार चैनेल पर 
बलात्कार अपहरण भ रहल 
विज्ञापन में  मर्द क वस्तु के 
नारी के मुग्ध देखोल जा रहल 
सी आइ डी के नाम पर नव नव 
अपराध क  तरीका उधिआय रहल 
भांति भांति के रिमिक्स संगीत में 
नग्न-अर्धनग्न नारी सजी रहल 
कत गेल भारतीय संस्कृति 
नारी क छवि अभिराम 
पुरुषक यौवन ललाम 
आतंकवादी  जकां टी वी-सभ्यता 
चुपचाप कहिया कोना 
प्रत्येक घर में घुसि गेल 
कतेक तरहक आतंक सँ घरक देवार  कांपि गेल  
के जनैत छल टी वी क नाम पर इ  डिब्बा 
कोन कोन रंग देखाओत 
घर घर में कचरा-पेटी बनि
अपसंस्कृति क गन्ध पसारत 
देशक कर्ण धार के ओहि पेटी में भरि बाहर फेकि आयत....

Tuesday, November 13, 2012


ये बुझते दीये ,ऊँघते लोग 
खामोश सुबह , सोयी पड़ी सड़कें 
क्या खुशियों के मौसम के बाद 
ये ही माहौल आता है...??

Ye bujhte diye ,unghte log 
Khamosh subah ,soyi parhi sadken 
Kya khushiyon ke mousam ke baad 
Ye hi mahoul aata hai...????

Sunday, November 11, 2012

HAPPY DEEPAVALI

खुबसूरत सा एक पल किस्सा बन जाता है 
जाने कब कौन ज़िन्दगी का हिस्सा बन जाता है 
कुछ लोग जिंदगी में मिलते हैं 
जिनसे कभी न टूटने वाला रिश्ता बन जाता है.......
ज्यों दीप से दीप मिल नया अलोक -लोक सज जाता है 

धरती पर जितने दीप जले उतनी खुशियाँ तुम्हे मिले।।

Khubsurat sa ek pal kissa ban jata hai / jane kb koun jindagi ka hissa bn jata hai / kuchh log zindagi me milte hain ,, jinse kabhi n tutane wala rishta bn jata hai /jyon deep se deep mil alok lok saj jata hai / dharti par jitne deep jale, utni khushiyan tumhe mile ....HAPPY DIWALI

Thursday, November 8, 2012


सदियों से तडपता जलता सुलगता 
अपना मन याद आ जाता है 
जब तुम्हारे होठों में 
सिगरेट जलती देखती हूँ 
तुमने सिगरेट नही 
मेरे जलते दिल को 
अपने सर्द होठों से लगा रखा है 
क्या ऐसा एहसास तुम्हे नही होता ?? 
लेकिन तुम्हारे होठों से लग 
ये दिल और भी जल उठता है 
जलते सिगरेट की चिंगारियां भड़क 
उठती है 
मेरे अरमानो की तरह 
मेरे ज़ज्बातों की तरह 
राख हो जाने के लिए।।।।।।