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Sunday, November 25, 2012

स्नेह की सत्यता

स्नेह की सत्यता को ह्रदय की गहराई से सोचें ,समय की इकाई से न तौलें। कब किसके साथ कौन सी स्थिति रहती है -कोई नही जानता .कभी किसी ग़लतफ़हमी में पड़ कर अपने मन को मलिन न करें, रिश्ते टूटने में क्षण भी नही लगते किन्तु जोड़ने में वक़्त का कितना पानी बह जाता है, जुटता भी है तो एक दरार लिए ..लोगों को स्नेहिल ह्रदय से पहचान रिश्ता बनाये रखें।।फिर विश्व बंधुत्व की भावना भी साकार होती जाएगी.........सुप्रभा
त।।।.
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Sneh ki satyta ko hriday ki gahrai se sochen, samay ki ikai se na toulen. kab kiske sath kon si sthiti rahti hai- koi nhi janta ,kabhi kisi galatfahmi me parh kar apne mn ko malin na karen. rishte tutane me kshn bhi nhi lagte kintu jodne me waqt ka kitna pani bah jata hai ,jutata bhi hai to ek darar liye. logon ko snehil hriday se pahchan rishta banaye rakhen....fir vishw bandhutw ki bhawna bhi sakar hoti chali jayegi...GOOD MORNING...

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