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Monday, November 26, 2012

,संतोष का वटवृक्ष


जमीन का एक टुकड़ा मेरे हिस्से का मेरा अपना था 
नितांत अपना।
साऱी  इच्छाओं ,कामनाओं के बीज 
मैंने रोप दिए थे उसमे 
आंसुओं की धार  से जिसे सींचा था मैंने 
गेहूं धान उगाये थे मैंने किन्तु, 
सभी उसे कुचलते रौंदते चले गए,,,,, 

जमीन का एक टुकड़ा मेरे हिस्से का मेरा अपना था
जिसमे  अपने विश्वास के बीज  रोप थे मैंने 
उससे अन्कुराए थे आशा  के नन्हे नन्हे फूल  
डाल डाल  विहंस उठे थे 
किन्तु अविश्वास और विस्मय से भरे अस्थिर मन 
लोगों  ने चूर चूर क्र दिए मेरे विश्वास को
मेरी आश को  ,,,,,,,,,,

जमीन का एक टुकड़ा मेरे हिस्से का मेरा अपना था
रोप दिए मैंने सपने अपने 
प्रेम व् स्नेह से कुछ अद्भुद कर दिखाने  का  
मानवता का संसार बसाने का .,,,,,,
आज समस्त विश्व मेरे सपने को आँखों में भर 
सत्य शिव व् सुन्दर की ओर आगे बढ़ रहा है 
मेरी जमीन 
उर्वरा हो रही है,,,संतोष का वटवृक्ष फैलता जा रहा है।।।।।

सत्य


जब  जब मैंने सत्य को खोजना चाहा 
असत्य मेरे समने आ   मुस्कुराने लगा
मन मेरा हारने लगा 
रेत की दीवार पर 
लहरों के तट पर
चांदनी खोजती रही 
प्रत्येक चेहरे से पेड़ों की छाल की तरह 
नकाब उतारती  रही 
कितना  विरूप है ये असत्य ,  कितना कठोर 
तपते मरुथल में मै भागती रही
जिन्दगी से समझौता करती रही
संस्कार को बनाने के लिए 
व्यवस्था के प्रपंच को कुचलने के लिए 
पता नही कब कैसे इस व्यवस्था का अंग बन गयी  
मै स्वयम असत्य बन गयी .......
औरों के आंसू पोंछते
आँचल खुद का भिंगो गयी .................
 

Sunday, November 25, 2012

स्नेह की सत्यता

स्नेह की सत्यता को ह्रदय की गहराई से सोचें ,समय की इकाई से न तौलें। कब किसके साथ कौन सी स्थिति रहती है -कोई नही जानता .कभी किसी ग़लतफ़हमी में पड़ कर अपने मन को मलिन न करें, रिश्ते टूटने में क्षण भी नही लगते किन्तु जोड़ने में वक़्त का कितना पानी बह जाता है, जुटता भी है तो एक दरार लिए ..लोगों को स्नेहिल ह्रदय से पहचान रिश्ता बनाये रखें।।फिर विश्व बंधुत्व की भावना भी साकार होती जाएगी.........सुप्रभा
त।।।.
.
Sneh ki satyta ko hriday ki gahrai se sochen, samay ki ikai se na toulen. kab kiske sath kon si sthiti rahti hai- koi nhi janta ,kabhi kisi galatfahmi me parh kar apne mn ko malin na karen. rishte tutane me kshn bhi nhi lagte kintu jodne me waqt ka kitna pani bah jata hai ,jutata bhi hai to ek darar liye. logon ko snehil hriday se pahchan rishta banaye rakhen....fir vishw bandhutw ki bhawna bhi sakar hoti chali jayegi...GOOD MORNING...

धरती के देवता


डॉक्टर !
तुम धरती के देवता हो
हाथों में औजार लिए शल्य क्रिया से
ह्रदय नारी का
तार तार कर देखा तुमने ;
प्यार,ममता,मोह आदर से भरे
लहुलुहान पिंड को किनारे रख दिया तुमने
अस्थि चर्ममय देह के सारे अवयव
यंत्र मात्र है तेरे लिए
चीरा, काटा कुछ टांको से घाव
भर दिए तुमने !
किन्तु, तुम भूल जाते हो
नारी का अंतर्मन भी होता है एक
जहा त्याग ओ समर्पण के फूल खिलते है
वहां तक तुम्हारे एक्सरे की पहुँच नही
किसी भी मशीन की पहुँच नही
विज्ञान लाख तरक्की कर जाये
सभ्यता विकसित होती जाये
किन्तु, तुम नारी के मन को पहचान न पाओगे
अधूरे उपचार से प्राण नही भर पाओगे ..मन को जानने
मन की जरुरत है
उपचार शल्य क्रिया की नही..
शाश्त्र पढ़ तुम धरती के देवता बन गए
किन्तु नारी शक्ति है
शक्ति के बिना देवता कुछ भी नही
पढ़ चुके मानव वेद, इतिहास सब , नारी के मन को पढ़ न सके.
युग युग से भीत चकित नारी
स्वयं अपने को जान न सकी.....
 
 

Saturday, November 24, 2012

वीराने मे कैक्टस

कितना मुश्किल है जिए जाना भी 
जिंदगी की कैद मे साँस लेना भी 
दिल के जख्मो मे भी आंसू निकल आये 
खून के कतरों मे भी दर्द छलक आये 
कितने अरमा से छुवा था मैंने गुलाबो को 
उफ़ हथेलियों तक मे कांटे उभर आये 
चल दिए तुम भी इस जहाँ से आह 
दिल के वीराने मे कैक्टस निकल आये 
यूँ गड़ती है कलेजे मे कभी याद भी तेरी
जैसे कैक्टस मे कोई फूल खिल आये

Friday, November 23, 2012

BATA DO JARA.

ज़िन्दगी से शिकायत करूँ तो नही ,किस ख़ुशी में रहूँ कुछ कहो तो जरा 
कौन सुरभित सुमन की प्रशंसा करूँ 
कौन सा चाँद देखूं व्यथा -व्योम में 
कौन सा पथ चलूँ ,कौन मंजिल चुनु 
कौन दीपक जलाऊं तिमिर तम  में
ये सही है कि  मेरी व्यथा   कुछ नही ,   दो घडी दर्द मेरा सहो तो जरा.......

Zindagi se shikayt karun to nhi ,kis khushi me rahun kuchh karo to jara 
Koun surbhit suman ki prashansa karun , kon sa chand dekhun vytha vyom me 
kon sa path chalun , kon manzil chunu , kon dipak jalaun timir tm me 
ye sahi hai ki meri vyatha kuchh nhi , do ghadi dard mera saho to zara..........

Thursday, November 22, 2012

DISCRIMINATION AGAINST WOMEN



 

 
Right cannot be enjoyed without knowledge of their existence. Justice cannot be obtained without awarness of the remedies available to correct injustice. Human rights are increasingly vulnerable. Our society is scared by an increasing number of Humun Rights violations.
 
It is an old saying that the hands of a women are behind every man's success. Even our religious and Scared book Durga-Saptashati  has recognized that every women possesses Power, Energy & Respect like Goddess Durga  and she is a part and parcel of the Goddess.
 
The concept of Ardh-Narishwar and it's worship are indicative of the basic fact that man and woman play equal parts in creation 'या देवी सर्व भूतेशु मात्रीरुपें संस्थिता ,' या देवी सर्व भूतेशु श्रध्हा रुपें संस्थिता'' या देवी सर्व भूतेशु शक्ति रुपें संस्थिता" etc. Mantras support the said concept. The aim of the humanity should be to give a practical shape to the concept and make the same a part  of our thought  and conduct . Then alone the development of Woman Folk and entire Nation is possible.
 
In conformity with the aforesaid thought Article-7 of the 1993 United Nations Convention on the elimination of all forms of discrimination against women calls upon all Government to ensure women's full participation in the political and public life of their countries, but our experience is that women are subjected to various types of discrimination including torture and harassment because of their civil, political, social, cultural or economic activities.
 
In principle Human Rights of Women are an integral part of Univerasal Declaration of Human Rights. The full and equal participation of women in Political, Civil, Economic, Social and Cultural life at the National, Regional and International level are the basic objectives of the International Community. Eradication of all forms of discrimination on grounds of sex is one of the main objectives, but discrimination and violence experienced are reported from every nook and corner of the world. Journalists in Morocco, Lawyers in the Phillipines, Judges in Columbia, Political Reforms in Burma, Opposition Leaders in Mozambique, Environmentalists in Kenya, Feminists in Peru, Academics in China have suffered the pangs of misries because of their participation in the political and public life of their countries.
 
Recently, efforts have been made worldwide to determine the condition of women. It has been found that majority of world's poor are women and the number of women living in rural poverty has increased by 50% since 1955. The number of illiterate women rose to 597 million in 1985 from 543 million in 1970. This shows that majority of world's illiterate are women. The statistics also showed that women earned 30% to 40% lesser than for doing equal work in violation of the human right of equal pay for equal work. They work for 13 hours a week more than men and in Asia and Africa they are mostly unpaid. They hold between 10% to 20% managerial and administrative jobs only. They make up less than 5% of the World's Heads of States.
 
It is thus evident that the discrimination against women is all pervasive throughout the world, though Equality of Rights for women is the basic feature of the United States.  
 
 In our Country the situation is more alarming. The marriage which is the basic need of human society for procreation has degenerated due to the virus of dowry system. Marriage can be performed by the equal participation of men & women, but dowry system has become so rampant that only women are victimized. We all know that marriage is a social system for systematic existence of our society, but it is not known why only women should be victimized, tortured, burnt or killed. Hardly any case has been reported in which any man has suffered due to the evils of dowry. Is not it a vital and fatal discrimination?
 
Women do jobs mostly for the financial support of their family, but when any trouble arises with women, men very often harass them instead of extending help. When the joint family breaks it is only the Women, who are made responsible for it. When a person dies in rural area the responsibility for the said death is thrown on women with the allegation of practising witchcraft and they are severely tortured. 
 
There are countless instances of discrimination of severe consequences. Will the society ever bring women on equal footing with men? 
 
                                                              DR. SHEFALIKA VERMA
  


PARICHAY


अपने जीवन का परिचय किससे कहना 
कैसे कहना !
धरती के कण कण में अपने मन का 
रमते रहना 
मिटने में ही मैंने जाना जी जाने का 
स्वाद 
आंसू के माला का तर्पण 
औ हँसने  का अवसाद !
तुमने कहा बंधु  मेरे
लो मेरा ये वरदान 
मेरे स्नेह के निभृत निलय में पी जाओ 
सब अपमान  
तुमने केवल सहना जाना ,सहने में जीवन 
की प्यास मै 
अमृत ले आया हूँ , करुण जगती की आस '`
मैंने अपने दृग उठाए अचंचल स्थिर पलक 
पुतलियों की लहरों पर 
वेदना थी रही छलक ..
तुम तो अमृत के बेटे हो , अमृत लेकर आये हो 
मेरे अभाग्य को अपनाकर निज 
सौभाग्य बनाने आये हो पर 
मै हूँ अभिशाप की छाया जलना और जलाना जाना 
तेरे अमृत-घट को भी झुलसाना  जाना 
दूर रहो तुम मीत मेरे 
मेरे सुख दुःख मेरे गम से अभिशाप की बदली में 
डूबे 
टुकड़े टुकड़े जीवन के तम से ............



Thursday, November 15, 2012

T V


टी वीक छोट छोट परदा पर माता पिता 
भाई बहिनक संग 
बाल बच्चा सँ भरल घर में 
स्त्री पुरुषक
कोन रूप देखाओल जाय रहल 
एक एक टा पत्नी के दुई दुई पति 
आय घरे घर परोसल जा रहल 
ककरा चुनी ककरा राखी
अपूर्व भाव  देखाओल जा रहल समाचार चैनेल पर 
बलात्कार अपहरण भ रहल 
विज्ञापन में  मर्द क वस्तु के 
नारी के मुग्ध देखोल जा रहल 
सी आइ डी के नाम पर नव नव 
अपराध क  तरीका उधिआय रहल 
भांति भांति के रिमिक्स संगीत में 
नग्न-अर्धनग्न नारी सजी रहल 
कत गेल भारतीय संस्कृति 
नारी क छवि अभिराम 
पुरुषक यौवन ललाम 
आतंकवादी  जकां टी वी-सभ्यता 
चुपचाप कहिया कोना 
प्रत्येक घर में घुसि गेल 
कतेक तरहक आतंक सँ घरक देवार  कांपि गेल  
के जनैत छल टी वी क नाम पर इ  डिब्बा 
कोन कोन रंग देखाओत 
घर घर में कचरा-पेटी बनि
अपसंस्कृति क गन्ध पसारत 
देशक कर्ण धार के ओहि पेटी में भरि बाहर फेकि आयत....

Tuesday, November 13, 2012


ये बुझते दीये ,ऊँघते लोग 
खामोश सुबह , सोयी पड़ी सड़कें 
क्या खुशियों के मौसम के बाद 
ये ही माहौल आता है...??

Ye bujhte diye ,unghte log 
Khamosh subah ,soyi parhi sadken 
Kya khushiyon ke mousam ke baad 
Ye hi mahoul aata hai...????

Sunday, November 11, 2012

HAPPY DEEPAVALI

खुबसूरत सा एक पल किस्सा बन जाता है 
जाने कब कौन ज़िन्दगी का हिस्सा बन जाता है 
कुछ लोग जिंदगी में मिलते हैं 
जिनसे कभी न टूटने वाला रिश्ता बन जाता है.......
ज्यों दीप से दीप मिल नया अलोक -लोक सज जाता है 

धरती पर जितने दीप जले उतनी खुशियाँ तुम्हे मिले।।

Khubsurat sa ek pal kissa ban jata hai / jane kb koun jindagi ka hissa bn jata hai / kuchh log zindagi me milte hain ,, jinse kabhi n tutane wala rishta bn jata hai /jyon deep se deep mil alok lok saj jata hai / dharti par jitne deep jale, utni khushiyan tumhe mile ....HAPPY DIWALI

Thursday, November 8, 2012


सदियों से तडपता जलता सुलगता 
अपना मन याद आ जाता है 
जब तुम्हारे होठों में 
सिगरेट जलती देखती हूँ 
तुमने सिगरेट नही 
मेरे जलते दिल को 
अपने सर्द होठों से लगा रखा है 
क्या ऐसा एहसास तुम्हे नही होता ?? 
लेकिन तुम्हारे होठों से लग 
ये दिल और भी जल उठता है 
जलते सिगरेट की चिंगारियां भड़क 
उठती है 
मेरे अरमानो की तरह 
मेरे ज़ज्बातों की तरह 
राख हो जाने के लिए।।।।।।

Tuesday, November 6, 2012


Yester day I saw the 
Setting sun of my face 
Pale but bright 
Painful but hopeful 
A new sunshine will Come again .......
I m not lost  
But 
Gaining something ...
Everything..Every day.....