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Friday, October 30, 2015

करवा चौथ

बूढ़ी माँ 
करवा चौथ के दिन निहार रही थी
बालकोनी से चुपचाप 

सामने पार्क की चहल पहल
हंसी की फुलझड़ियाँ ठहाकों का
गर्म बाजार
मेहँदी रचाती अल्हड बहुएँ बेटियां
बूढी माँ अपनी सूनी हथेलियों को देखती रही
एक उसाँस उसकी छाती चीर निकलती रही
कभी हम भी नारी आंदोलन में रहते थे
पर माता पिता को पहले पूजते थे
बबुआ के पिता भी न जाने कहाँ चले जाते हैं
अवकाश प्राप्त का जीवन वह जी नही पाते हैं
वह कभी अपनी झुर्राती हथेलियों तो कभी
अपनी श्लथ अँगुलियों को निहारती है
एक इंतज़ार खत्म होता है
पति की आँखों में एक खालीपन
पत्नी की मेहँदी विहीन हथेलियों को देख
उसके सूने नयनो में बादल आ जाते हैं
उसकी हथेलियों को प्यार से चूमते --
लो तेरे हाथों में मैंने प्यार की मेहँदी रच दी
वे तो बच्चे हैं हमारे
जो कभी हम थे आज बच्चे हैं हमारे
पत्नी का सर पति के सीने पे लुढ़क जाता है
करवा चौथ का व्रत पूरा हो जाता है------


आह ! रौशनी सी रात मे
चांदनी की शमा जल रही थी
कांच की दीवारों से झांकती
हर लम्हा तेरी याद दिला रही थी
ओ पल आज भी याद है मुझे
तुम्हारी आँखों ने जब
मुझे प्यार किया
दिल का अन्धेरा रोशन हो गया था
आज भी तुम्हारी उन्ही
प्यार भरी नज़रों की आस लिए
अधरों में मुस्कान लिये
बैठे हैं हम शरद पूर्णिमा की
धवल तन्हाइयों मे........
रावण जल गया उस महान पंडित को बुराइयों का प्रतीक समझ हम हर साल जलाते हैं , करोड़ों रूपये स्वाहा कर , वातावरण को प्रदूषित कर हम आनंद मनाते हैं --पर क्या हम अपने अन्दर की बुराईयों को नष्ट कर पाते हैं , अहंकार का नाग फन काढ़े हमारे ह्रदय को ग्रस रहा होता , क्या हम उसे मार पाते हैं??? काश ! मानव मानव बन पाता !, अपने बहार भीतर को पारदर्शी ,निरभ्र और स्वच्छ बना पाता है ???
प्रश्न ढेरों ढेर ,उत्तर कहीं नही.
.देश में किसी के पास नही---

Friday, October 23, 2015

खून के रिश्ते हथेली की उँगलियों की तरह होते हैं  
अपने आप में निर्बंध 
स्वछन्द।
अपने अपने आकाश 
अपने ही संसार
किन्तु
जब किसी पर कोई विपत्ति 
कोई प्रहार होता है 
सारी उँगलियाँ मुट्ठी बन सशक्त हो जाती है
सभी एक हो जाते हैं

ये खुशबू होती है रिश्तों में …।

,Khoon ke rishte hatth ki ungliyon ki tarah hote hain ,apne aap me nirbndh, swachchhnd, / apne apne akash, apne hi sansar . / kintu ,jb kisi pr koi vipatti, prahar hote hain to ,sari ungliyan muthhi bn sashkt ho jati hai / sbhi ek ho jate hain ..ye khushboo hoti hai rishto ki..