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Sunday, November 25, 2012

धरती के देवता


डॉक्टर !
तुम धरती के देवता हो
हाथों में औजार लिए शल्य क्रिया से
ह्रदय नारी का
तार तार कर देखा तुमने ;
प्यार,ममता,मोह आदर से भरे
लहुलुहान पिंड को किनारे रख दिया तुमने
अस्थि चर्ममय देह के सारे अवयव
यंत्र मात्र है तेरे लिए
चीरा, काटा कुछ टांको से घाव
भर दिए तुमने !
किन्तु, तुम भूल जाते हो
नारी का अंतर्मन भी होता है एक
जहा त्याग ओ समर्पण के फूल खिलते है
वहां तक तुम्हारे एक्सरे की पहुँच नही
किसी भी मशीन की पहुँच नही
विज्ञान लाख तरक्की कर जाये
सभ्यता विकसित होती जाये
किन्तु, तुम नारी के मन को पहचान न पाओगे
अधूरे उपचार से प्राण नही भर पाओगे ..मन को जानने
मन की जरुरत है
उपचार शल्य क्रिया की नही..
शाश्त्र पढ़ तुम धरती के देवता बन गए
किन्तु नारी शक्ति है
शक्ति के बिना देवता कुछ भी नही
पढ़ चुके मानव वेद, इतिहास सब , नारी के मन को पढ़ न सके.
युग युग से भीत चकित नारी
स्वयं अपने को जान न सकी.....
 
 

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