Wednesday, July 10, 2013

हमरा ज्ञात भेल जे हमर कथा कविता पर शोध भ' रहल छैक , ख़ास कय हमर जीवन पर , एहि फेस बुक से सेहो उधृत क' रहल छैथ. हमर वादा अछि जे हम रही नय रही हमर इ फेसबुक, हमर पेजwww.facebook.com/DrShefalikaVerma?ref=tn_tnmn आ ब्लॉग http://shefalikavarma.blogspot.in/ सभ एहिना रहत ..कहियो ने ख़त्म होयत .कोना ?? ई भविष्यक गर्भ में अछि--एखन ते हम छी अहां क सोझा .. कोनो शक नै जे एहि में बहुत सामग्री छैक ...फेस बुक पर जे हम हिंदी में लिखने छी उहो प्रायः मैथिली क अनुवाद थीक ...हम जे लिखलों ओकरा कविता नहि बुझब वरन हम स्वयम छी /
हँ , हमरा दीर्घायु हेवाक शुभकामना जे दैत छैथ ओ सब टा आयु हुनके सब के लागि जाय --भगवती स हमर प्रार्थना ......

VERY GUD MORNING MY LOVING FRNDS !

मुझे ज्ञात हुआ मेरी रचनाओं पर शोध हो रहे हैं , मेरे जीवन पर भी =====और लोग फेसबुक का भी सहारा ले रहे हैं . मेरा वादा है मै न भी रहूँ तो भी मेरा ये फेसबुक यूँही चलता रहेगा , मेरा पेज ,/www.facebook.com/DrShefalikaVerma?ref=tn_tnmn, ब्लौग http://shefalikavarma.blogspot.in/ , सभी यथावत रहेंगे ..कैसे क्यों ---ये भविष्य के गर्भ में है. , अभी तो मै हूँ ना ...कोई शक नही जो इसमें बहुत सामग्री क्रिया प्रतिक्रिया आपको मिल जाएगी ,मैंने जो लिखा इस पर वो मेरी कविता नही स्वयम मै हूँ .....
मेरी लम्बी उम्र की प्रार्थना करनेवाले ---वो सारी उम्र आप सब को ही लग जाये…….

Monday, July 8, 2013

दिल से दिल बात होती है

यहाँ  दिल से दिल  बात होती है 
अनछुए अनजाने भावों की सौगात होती है 
दूरियां नही नजदीकियां नही 
बस  दिल से दिल तक पहुँचने की आवाज है 
न उम्र की सीमा है 
न रिश्तों की दीवार है 
न मिलने की , ना मिलने की कोई बात है 
ये तो बस  दिल से दिल  की  बात है 
यहाँ दिल मिलते हैं आदमी नही 
शब्द मिलते हैं तन्हाइयाँ  नही 
शब्द ब्रह्म है 
ये ब्रह्म से ब्रह्म तक पहुँचने का अद्भुद 
अंदाज़ है ...
हम हैं- आप हैं - दोस्ती का आगाज़ है ........


Thursday, July 4, 2013

शिक्षा

हमारे देश में शिक्षा सदा सर्वदा से प्रयोगशाला में रही है. नित नए नये प्रयोग. तंग आ गए हैं बच्चे ..क्या व्यवस्था इतनी कमजोर हो सकती है ??  
19 53  में बच्चों को मेट्रिक में सारे विषय पढने होते थे. '58  के करीब साइंस आर्ट्स चुनने का मौका मिलता था .  कौलेज में वही I A --B A  की २--२ साल की पढाई .. 81  में अचानक थ्री इयर्स डिग्री कोर्स की पढाई शुरू हो गयी . इंटर का एक साल मेट्रिक में जुड़ गया और वो बोर्ड परीक्षा हो गयी . इससे विद्यार्थियों को क्या फायदा हुआ ये तो भुक्तभोगी बच्चे और फ़ीस भरते माँ बाप ही जाने . . पहले बीए  करके प्रतियोगिता परीक्षा होती थी . अब बोर्ड के बाद . ये एक सुविधा मिलि.. .. हाँ स्कूल के नन्हे बच्चों के कन्धों पर भारी बस्ता हजार विषय पढने का आदेश .. एक तो युंही टीवि ., कम्पुटर की अपसंस्कृति ने बच्चों से उसकी मासूमियत छीन ली तो दूसरी और पढाई के बोझ से अधरों की मुस्कान छीन गयी . कंधे के बोझ से जवान होते होते कितनी बिमारियों से  आक्रांत हो जाते ये बच्चे। फिर एक नयी बात .  केजी  से ही बच्चों को प्रोजेक्ट वर्क करने की हिदायत .  आगे क्लास में तो इतना कठिन और खर्चाऊ है की स्कूल के टीचर भी परेशान हम क्या करें ऊपर से ही आदेश आते हैं । ये ऊपर कौन है ...  ! .. पेरेंट्स बेचारे प्रोजेक्ट का सामान खरीदते खरीदते दाल चावल भूल जाते  हैं .... 
अब महाविद्यालयों का हाल .  दो साल के कोर्स से तीन  साल .. पहले सेंट अप परीक्षा होती थी अब ४--४  सेमेस्टर होने लगे. बच्चे एक परीक्षा देते नही कि  दूसरी की तयारी शुरू कर देते  .. टीचर  प्रश्न पत्र सेट करते सिलेबस तुरत तुरत बनाते परेशां ... टीचर जहाँ कि  बच्चों के चरित्र निर्माण में घर के बाद वो ही सहायक होते थे ..कुछ लोगों के   चलते टीचर कम्युनिटी बदनाम हो गयी .  ये पढ़ाते  नही भागे रहते है।क्लास हो या न हो ४ घंटे बैठे रहो … देखते देखते सारा दिन बैठने का आदेश मिल गया  यानी समाज की प्रबुद्ध , बुद्धिजीवी कम्युनिटी को सारे देश  की राजनीति पर , ,सरकार  बनाने मिटने के लिए बातें करने का इससे अच्छा प्लेटफार्म अब क्या हो सकता है… ??इतना ही नही पहले पीएचडी  करो तब टीचर बनोगे , फिर नेट करो इस तरह से '81 से आज तक शिक्षकों की बहाली नही हुई , नेट और पीएचड़ी  की कतार लग गयी ,,,इधर गेस्ट .एड़ोक  की तू ती बोल रही है साथ ही अवकाश प्राप्त करने की उम्र साठ से पैंसठ कर दी गयी ..समझ में नही आता हो क्या रहां है ? … 
किन्तु, इस सब से सरकार ने देश का, समाज का क्या भला किया ?/ बच्चे परीक्षा देने जाते हैं ..एडमिट कार्ड  नही आया  है ..लौट जाओ का तानाशाही  आदेश। बच्चे हताश निराश हमारा क्या दोष है ! 
बोर्ड का अंक प्रतियोगिता में जुटेगा  , इंजीनियर बनने वाले  कुछ खुश कुछ दुखी  ; डाक्टरों को एम् डी  एम् एस के लिए कोर्ट का आदेश। अपने अपने राज्य से सीट लो किन्तु जिस राज्य में सीट ही न हो। भाड़  में जाओ, जब तक उम्र है देते रहो परीक्षा /..  अब नया  फरमान यूजीसी  का --- महिलाओं  को सीट  इसलिए देता हूँ  कि वे तनखा कम लेती हैं .... ये कौन सा तर्क है !.फिल्मो को देखो, जितनी गंदगियाँ है सब को नग्न कर दर्शकों  के सामने परोसती है , और वाहवाही लूटती  है करोड़ों की कमाई  हो रही है .. कौन जाते वक़्त पैसे लेके जाता है , देह के कपडे तक उतार मिटटी में मिला देते हैं ...  उफ़ !  क्या हो रहा है इस देश में // व्यवस्था रोज नए रंग ला रही कागजों में , पर समाधान के लिए कहीं कुछ नही । देश के युवाओं को मार कर  , हताश निराश कर सरकार को  क्या  मिला ; जब सरकार  अच्छी  तरह जानती है ...ये ही भविष्य है मेरे भारत विशाल के ....पर  भारत कहाँ ..देश कहाँ ... ????? 
क्रमश;     

Sunday, June 23, 2013

जिंदगी

मेरी जिंदगी एक खुली किताब है . पढने वाली आँखें , समझने वाला ह्रदय चाहिए ...
कहीं कुछ भी छिपा नही ..मै  प्यार के सिवा कुछ भी नही ..प्यार - प्यार और प्यार ......

my  life is like an open book . there should b d eyes 2 see , d heart 2 understand ,nothing is secret . I m nothing bt a Love love n love 

Friday, June 21, 2013

SHIMLA..

प्रकृति का संगीत सुनाती एक ख़ामोशी 
जिसकी धुन पर मन की मीरा बावरी हो 
उठी जैसे अपने सांवरिया के लिए ........

शिमला में ...

गरज कि काट दिए ज़िन्दगी के दिन ऐ दोस्त 
वो तेरी याद में हो वा कि तुझे भुलाने में ..' 

शिमला में ...

OUR STAY IN HOTEL PETERHOFF, SHIMLA

IT WAS THRILLING DAYS 4 US --WE STAYED IN THIS HISTORICAL HOTEL PETERHOFF OF SHIMLA 

The Peterhoff is a building in Shimla which has housed at least seven Viceroys and Governors General of India during the British Raj.
Its first occupant was James Bruce, 8th Earl of Elgin, who moved into the building in 1863.[1]
After India's independence from the British Empire, the building served as the Punjab High Court. It was at Peterhoff where the trial of Nathuram Godse, who assassinated Mahatma Gandhi, took place in 1948-49.[2] In 1971, when Himachal became a full-fledged state, Peterhoff served as the Raj Bhavan (the Governor's residence).[3].

Wednesday, June 12, 2013

दर्द

हर रात
  एहसास होता है 
तुम्हारे होने का 
   जिसका वजूद 
  दिन के कोलाहल में
   छुप सा जाता है 
         दर्द गहरा हो जाता है. ......

प्यारा लगने लगता है मुझे .

परछाइयों को पकड़ने की 
आदत
कुछ इस कदर हो गयी है मुझे 
देखती हूँ दर्पण में 
चेहरा अपना 
परछाहीं तेरी ही
मेरे अक्सों में उभर आती है ..
अपना चेहरा भी
 प्यारा लगने लगता है मुझे ...

Monday, May 27, 2013

तुम मेरी जिस मुस्कान पर मरते हो दरअसल मेरी नही है--- हाँ कभी मेरी हुआ करती थी ---किन्तु आज की तारीख में ये उधार की ली है ..किसी और से नही बस तुम सब के प्यार की खुशबू मेरी मुस्कान बन गयी .. जानती हूँ खुशबू ख़त्म न होगी ---ये मुस्कान मेरे साथ जाएगी ....तुम कभी वापिस न लेना इसे…