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Wednesday, July 24, 2013

-… अंतहीन निःशब्द .

जिंदगी यायावर हो गयी है --सबेरे सबेरे छत को देखना  --मेरी ही छत है ये ?-- मै अपने ही  घर  में हूँ ? --घर क्या --एक कमरा मेरा अपना - यादों  भरा एक पलंग -- प्यार एहसास भरे उपहार -- टी वी,  स्नेह से ओतप्रोत एक लैपटॉप   अनगिन संदेशों से भरा  एक  मोबाइल और बिस्तर पर पड़े कागजों की ढेर --लिखे -- अधलिखे -जन्मे अजन्मे भाव-शिशुओं का कलरव --मेरे  होने का    एहसास दिलाता --मेरे अस्तित्व को  झकझोरता --  यादों की तस्वीरें  मेरी रूह को कँपकपाती --हाथ पैर मारते छटपटाते मेरे शब्द विकल ---क्या ये  मै हूँ ---   डबडबाई आँखों में सपनो की  किश्तियाँ --कितने सवाल --कितने प्रहार-- निरंतर मेरे सामने सर झुकाए--- उत्तर के लिए बेकल---जो  कुछ   घटता  मन की तहों में घटता …अंतहीन    निःशब्द……  …और मेरी साँसे हैं कि खत्म   नहीं  होती ----…  .….     
Zindagi yayawar ho gayi hai --sabere sabere chhat ko dekhna - meri hi chhat hai ye ? ..mai apne hi ghar me hun ?- ghar kya - ek kamra mera apna --yadon bhara  ek palang -- pyar ehsas bhara ek t v --kisi ke sneh se otprot  ek laptop , angin sandeshon se bhara ek mobile aur bistar pr parhe kagzon ki dher --likhe anlikhe --jnme ajanme  bhaw shishuon ka kalraw --mere hone ka ehsas dilata --mere astitw ko jhakjhorta --yadon ki tasweeren meri rooh ko knpknpati -- hath pair marte mere shabd vikal -- kya ye mai hun --dabdabaayi ankhon me sapno ki kishtiyan ----kitne sawal kitne prahar nirantar mere samne sar jhukaye --uttar ke liye bekal -- jo kuchh ghatataa mnn ki tahon me ghatata  anthin -- nihshabd ....aur meri sanse hai ki khatm nhi hoti --anthin - nihshabd---......

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