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Tuesday, July 3, 2012

अब मै नाच्यो बहुत गोपाल


उस दिन स्कोट्लैंड में विचरती  लगा अरे इन पहाड़ियों के बीच तुम छिपे हो..बेन हिल्स  की पहाड़ियों में गुम सडक यूँ जैसे आगे जाने का रास्ता ही बंद हो ..मुझे लग रहा था उस बंद रस्ते के पास तुम्ही छिपे हो ..हमारी गाड़ी आगे बढती रही,,उस बंद जगह से भी  सुन्दर सडक निकलती गयी...और जैसे मेरे मन में ज्ञान का आलोक लोक पसरता गया  , लगता था जीवन प्रतिपल नयी दिशा को छू रहा हो . नए क्षितिज में प्रवेश कर रहा हो. एक नए सूरज को देख रही हूँ  .नयी रात , नए  सितारे नए सागर तट , लगता है सारे संसार की श्रृष्टि अपने  अद्भुद  व्यक्तित्व में समाविष्ट है. चाहे वो फूल हों, पत्ते हों ल़ोक्स हो  , ल़ोक्स के बीच में कहीं द्वीप , कहीं प्रायद्वीप भी अपनी हरीतिमा  नहि खो रहे थे , कहीं किसी लोक ( झील )  में अकेला बेसहारा मोटर बोट बेसहारा सा कांपता रहता तो कहीं हुजूम के हुजूम मोटर बोट ...यहाँ लोग समुद्र के किनारे , जंगलों के बीच  घर बना कर को या नही तो चलते फिरते घर यानि कारवान लेकर खेमा गाड देते .
जिधर नजर जाती ,चकित विस्मित मै रह जाती  हवा के वेग में  हिलते डुलते देख अपनी याद आ जाती थी . सब कहते पुराने को भूल जाइये नए का स्वागत कीजिये. , नये को देखिये , जीवन सतत प्रवाह है, किसी के लिए  ठहरता  नही. रोज नया होते चला जाता है , जो कल हम घूम घूम कर देख रहे थे , वो आज नही है.....वास्तव में , देखती हूँ रोज सब नया है , रस्ते के वृक्षों , जंगल झाड़ों को , उगते डूबता सूरज को प्रत्येक दिन दशा दिशा बदली सी लगती है .और मै हूँ कि पुराने में जिए चली जाती हूँ.लगता ही नही कि कहीं कुछ बदला , मन में तो पुराना ही बसा रहता है और संसार है कि प्रतिपल बदलता रहता है...हम पुरानी स्मृतियों में , जो जी चुके हैं  उसे संजोये नए को जी नही पा रहे हैं...कल हमने स्कॉट्लैंड में जो प्रकृति की सुषमा देखी...खो गयी...
३.७. '१२
..आज हमारी शादी की वर्षगांठ है..नही जानती कितने साल बीते,  जानती हूँ ये कल ही की तो बात है... 
मै नही जानती पुनर्जन्म होता है या  नही किन्तु अनंत काल तक मेरी आत्मा तुमसे एकाकार होने के लिए छटपटाती रहेगी. हिमालय की उपत्यका मे , प्रकृति की रमणीक पृष्ठभूमि मे मेरे तुम्हारे प्रणय का संगीत  ह्रदय ह्रदय को बांध बैठा था.--' छवि के स्वर्ण-नदी तट पर तुम्हे मैंने जभी देखा / ह्रदय पर खिंच गयी मेरे , तुम्हारे रूप की रेखा, प्रणय का जल उठा दीपक मगर श्रृंगार बाकी है , .....सप्तपदी से पहले तुम्हारी ये आकुल स्वर लहरी '  ....आज भी बेचैन कर जाती है मुझे..........
 .क्रमश; ---- ( मैथिली से  अनूदित )

7 comments:

  1. Ever since the day I was born.
    You have nurtured me with love and kindness.
    You have been someone I can believe in,
    And someone I can depend upon.
    In this world I am just staring to understand.
    And it's important to me that you know
    How grateful that I am,
    For all that you give to me,
    For all that you teach me,
    And for the strength I will always have,
    Because of you, dadima and dadaji .
    ~Happy Anniversary~

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    1. u loved us so much, we too darling..u look like ur dada ji beta...I feel him in u all betu..
      this blog is also the creation of urs, I write only, u decorate it little angel...lv u, SANSKRITI ...

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  2. thanx alot sanskriti darling...
    we always with u . lov u beta....

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  3. लेखनी का जादू .. अतीत की स्मृतियों को जीवंत चित्रित करता हुआ।
    शुभकामनाएं।

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    1. bahut dhanywad MK, jindagi bs kagaj kalam me hi simat kr rah gayi..yun kaho ki zamana badal gaya, mai bhi badal gayi, kagaj kalam nam ke rah gaye..net ne zagah le li.Par , hriday to wahi raha..................

      suprabhat.....

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  4. happy anniversary....
    beautiful post.................

    regards

    anu

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    1. Bahut dhanywad anu
      shadi ki salgirah ki bhawnayen aap sb ke sath bantate hue...
      yadon ke siwa bacha hi kya hai ab..??
      aap sb ka pyar hi to yadon ko aur madhur banati hai......
      sneh ashesh, suprabhat...

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