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Tuesday, June 19, 2012


अहाँ ठीके बजने छलों 
सपनाक गीत 
जागल में नै गुनगुनाबी 
इजोरियाक  सिह्क्ब स कम्पित 
नहि भ जाऊ 
सिंगरहारि  बसात  में मोन के नहि 
भट्काबी......
सपनाक ई गीत जिनगीक रौद में खंड खंड 

भ जायत 
इजोरियाक सिहरब नागफनीक
काँट जकां समस्त तन के 
लहुलहुआन क' देत 
सिंगारहारि  बसात सँ
उपेक्षा क झोंक आबि जायत अछि 
अहाँ संसार छी 
जिनगी छी 
हम सांस छी 
स्वर्णिम किरण क आस छी..............

2 comments:

  1. ahan saripon swarnim kirank aas chhi..hmr sabhk madhur vishwas chhi......

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